1. ऋषियों ने तो यह कहा है कि बिल्वपत्र भोले-भंडारी को चढ़ाना एवं 1 करोड़ कन्याओं के कन्यादान का फल एक समान है।
2. बेल का वृक्ष हमारे यहां संपूर्ण सिद्धियों का आश्रय स्थल है। इस वृक्ष के नीचे स्तोत्र पाठ या जप करने से उसके फल में अनंत गुना की वृद्धि के साथ ही शीघ्र सिद्धि की प्राप्ति होती है।
3. इसके फल की समिधा से लक्ष्मी का आगमन होता है। बिल्वपत्र के सेवन से कर्ण सहित अनेक रोगों का शमन होता है। बिल्व पत्र सभी देवी-देवताओं को अर्पित करने का विधान शास्त्रों में वर्णित है।
4.
‘न यजैद् बिल्व पत्रैश्च भास्करं दिवाकरं वृन्तहीने बिल्पपत्रे समर्पयेत’ के अनुसार भगवान सूर्यनारायण को भी पूरी डंडी तोड़कर बिल्वपत्र अर्पित कर सकते हैं। यदि साधक स्वयं बिल्वपत्र तोड़ें तो उसे ऋषि आचारेन्दु के द्वारा बताए इस मंत्र का जप करना चाहिए-
‘अमृतोद्भव श्री वृक्ष महादेयत्रिय सदा।
गृहणामि तव पत्राणि शिवपूजार्थमादरात्।।’
 
5. लिंगपुराण में बिल्वपत्र को तोड़ने के लिए चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रांति काल एवं सोमवार को निषिद्ध माना गया है। शिव या देवताओं को बिल्वपत्र प्रिय होने के कारण इसे समर्पित करने के लिए किसी भी दिन या काल जानने की आवश्यकता नहीं है। यह हमेशा उपयोग हेतु ग्राह्य है।
6. जिस दिन तोड़ना निषिद्ध है उस दिन चढ़ाने के लिए साधक को एक दिन पूर्व ही तोड़ लेना चाहिए। बिल्वपत्र कभी बासी नहीं होते। ये कभी अशुद्ध भी नहीं होते हैं। इन्हें एक बार प्रयोग करने के पश्चात दूसरी बार धोकर प्रयोग में लाने की भी स्कन्द पुराण के इस श्लोक में आज्ञा है-
 
‘‍अर्पितान्यपि बिल्वानि प्रक्षाल्यापि पुन: पुन:।
शंकरार्यर्पणियानि न नवानि यदि क्वाचित।।’
बिल्वपत्र के वे ही पत्र पूजार्थ उपयोगी हैं जिनके तीन पत्र या उससे अधिक पत्र एकसाथ संलग्न हों। त्रिसंख्या से न्यून पत्ती वाला बिल्वपत्र पूजन योग्य नहीं होता है। प्रभु को अर्पित करने के पूर्व बिल्वपत्र की डंडी की गांठ तोड़ देना चाहिए। सारदीपिका के ‘स्युबिल्व पत्रमधो मुखम्’ के अनुसार बिल्वपत्र को नीचे की ओर मुख करने (पत्र का चिकना भाग नीचे रहे) ही चढ़ाना चाहिए। पत्र की संख्या में विषम संख्या का ही विधान शास्त्रसम्मत है।
 
7. बिल्वपत्र चढ़ाने के शुभ फल : शिवरात्रि, श्रावण, प्रदोष, ज्योतिर्लिंग, बाणर्लिंग में इसे भगवान रुद्र पर समर्पित करने से अनंत गुना फल मिलता है। किसी भी पूजन में या शिव पूजन में बिल्वपत्र का अनंत गुना फल मिलता है। किसी भी पूजन में या शिव पूजन में बिल्वपत्र का उपयोग अति आवश्यक एवं पापों का क्षय करने वाला होता है।
8. यदि किसी कारणवश बिल्वपत्र उपलब्ध न हो तो स्वर्ण, रजत, ताम्र के बिल्वपत्र बनाकर भी पूजन कर सकते हैं। ऐसा करने का फल भी वनस्पतिजन्य बिल्वपत्र के समकक्ष है।
9. यदि किसी संकल्प के नि‍मित्त बिल्वपत्र चढ़ाना हो तो प्रतिदिन समान संख्या में या वद्धि क्रम की संख्या में ही उपयोग करना चाहिए। अधिक संख्या के पश्चात न्यून संख्या में नहीं चढ़ाना चाहिए।
10. पुराणों में उल्लेख है कि 10 स्वर्ण मुद्रा के दान के बराबर एक आक पुष्प के चढ़ाने से फल मिलता है। 1 हजार आक के फूल का फल एवं 1 कनेर के फूल के चढ़ाने का फल समान है। 1 हजार कनेर के पुष्प को चढ़ाने का फल एक बिल्व पत्र के चढ़ाने से मिल जाता है।
11. इसके वृक्ष के दर्शन व स्पर्श से ही कई प्रकार के पापों का शमन हो जाता है तो इस वृक्ष को कटाने अथवा तोड़ने या उखाड़ने से लगने वाले पाप से केवल ब्रह्मा ही बचा सकते हैं। अत: किसी भी स्‍थिति में इस वृक्ष को नष्ट होने से बचाने के लिए प्रयत्नशील रहना आध्यात्मिक एवं पर्यावरण दोनों की दृष्टि से लाभकारी है।
12. बिल्वपत्र चढ़ाने के नियम : यदि बिल्वपत्र पर चंदन या अष्टगंध से ॐ, शिव पंचाक्षर मंत्र या शिव नाम लिखकर चढ़ाया जाता है तो फलस्वरूप व्यक्ति की दुर्लभ कामनाओं की पूर्ति हो जाती है। कालिका पुराण के अनुसार चढ़े हुए बिल्व पत्र को सीधे हाथ के अंगूठे एवं तर्जनी (अंगूठे के पास की उंगली) से पकड़कर उतारना चाहिए। चढ़ाने के लिए सीधे हाथ की अनामिका (रिंग फिंगर) एवं अंगूठे का प्रयोग करना चाहिए।
 

ऐसा माना जाता है कि अगर आपके घर में मकड़ी अपने जाल बन रही है तो यह दुर्भाग्य की निशानी होती है। जिस घर में मकड़ी अपने जाल बुनती है, वहाँ धन-दौलत की हमेशा कमी रहती है। ऐसा होने पर इसे तुरंत ही साफ़ कर दें और आगे से इस बात का ध्यान रखें कि मकड़ी अपने जाल घर या दुकान में ना बना पाए।

वास्तु के अनुसार घर-दुकान या उसके आस-पास कबूतर का घोंसला अस्थिरता पैदा करता है। केवल यही नहीं यह आपके जीवन में गरीबी को बुलावा भी देता है। कबूतर का घोंसला होने से आपके जीवन में हमेशा धन की कमी बनी रहती है।

हर कोई घर की सुन्दरता और माहौल को पवित्र बनाये रखने के लिए घर में पेड़-पौधे लगाता है। अगर आपके घर या दुकान में लगे हुए पौधे में सूखी पत्तियाँ दिखने लगे तो तुरंत ही उसे काट दें। यह आपके धन पर बुरा असर डालती हैं।

कई बार सीलन की वजह से घर की दीवारों पर निशान पड़ने लगते हैं और बाद में दीवारों की पपड़ी भी उतरने लगती है। अगर वास्तुशास्त्र की मानें तो यह बहुत ही अशुभ होता है और ऐसा हो जाने पर तुरंत उसे ठीक करवा देना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि टूटी और निशान पड़ी दीवारें घर में गरीबी और दुर्भाग्य को बुलावा देती हैं।

मधुमक्खी के छत्ते का आपके पैसे के ऊपर भी बुरा असर होता है। मधुमक्खी के छत्ते होने से लगातार पैसे से जुडी हुई अशुभ घटनाएँ होती हैं।

शास्त्रों के अनुसार चमगादड़ का दिखना ही अशुभ होता है। ऐसे में इस जीव का घर में रहना कितना अशुभ हो सकता है, यह बताने की जरुरत नहीं है। चमगादड़ का आस-पास होना गरीबी-दुर्भाग्य तो लाता ही है, साथ-साथ बीमारी भी लाता है।

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तंत्र क्रियाओं में अनेक वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है। काले घोड़े की नाल भी उन्हीं में से एक है। ऐसा मानते हैं कि तंत्र प्रयोग में यदि काले घोड़े की नाल का प्रयोग किया जाए तो असंभव कार्य भी संभव हो जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार, वैसे तो किसी भी घोड़े की नाल बहुत प्रभावशाली होती है लेकिन यदि काले घोड़े के अगले दाहिने पांव की पुरानी नाल हो तो यह कई गुना अधिक प्रभावशाली हो जाती है। आइए जानते है काले घोड़े की नाल के कुछ अचूक ज्योतिष उपाय-

* काले घोड़े की नाल से एक कील या छल्ला बनवा लें, शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भर कर ये छल्ला या कील उसमें डाल कर अपना मुख देखे और पीपल के पेड़ के नीचे रख दें। इससे शनि दोष में कमी आएगी।

 * काले घोड़े की नाल एक काले कपड़े में लपेट कर अनाज में रख दो तो अनाज में वृद्धि होती है और तिजोरी में रख दें तो धन संबंधी लाभ होता है। घर में बरकत बनी रहती है।

* यदि शनि की साढ़े साती या ढय्या चल रही हो तो किसी शनिवार को काले घोड़े की नाल से बनी अंगूठी विधिपूर्वक दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण कर लें। आपके बिगड़े काम बन जाएंगे और साथ ही धन लाभ भी होगा।

*  यदि घर में क्लेश रहता हो, आर्थिक उन्नति नहीं हो रही हो या किसी ने तंत्र क्रिया की हो तो घर के मुख्य द्वार पर नाल को अंग्रेजी के यू अक्षर के आकार में लगा दें। कुछ ही दिनों में नाल के प्रभाव से सबकुछ ठीक हो जाएगा।

* यदि दुकान ठीक से नहीं चल रही हो या किसी ने दुकान पर तंत्र प्रयोग कर उसे बांध दिया हो तो दुकान के मुख्य द्वार की चौखट पर नाल को अंग्रेजी के यू अक्षर के आकार में लगा दें। आपकी दुकान में ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगेगी और परिस्थितियां अनुकूल हो जाएंगी।

* अपने पैसों से किसी काले घोड़े के पैरों में नाल लगवा दें। इससे भी शनिदेव बहुत प्रसन्न होते हैं और भक्त की हर मनोकामना पूरी कर सकते हैं। इससे साढ़ेसाती व ढय्या के अशुभ प्रभाव में भी कमी आती है।

*  एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें काले घोड़े की नाल डाल दें। अब इस कटोरी को अपने सिर से पैर तक 7 बार घुमा कर किसी सुनसान जगह पर गाड़ दें। इससे बुरी नजर भी उतर जाएगी और यदि शनि दोष होगा तो वह भी कम होगा।

* अपनी लंबाई के बराबर काला धागा लें और उसमें 8 गठानें लगा लें। इस धागे को तेल में डूबोकर काले घोड़े की नाल पर लपेट लें और शमी वृक्ष के नीचे गाड़े दें। इससे सभी प्रकार के दुख-तकलीफों से मुक्ति मिलेगी। ये बहुत ही अचूक उपाय है।

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    • आप और उसे / उसे के बीच प्यार को पुनर्जीवित करने के लिए, एक केला ले और यह अच्छी तरह से मिश्रण Gorochan साथ। अपने माथे पर इस तैयार लेप। इस totka प्रदर्शन मनोरम शक्ति को बढ़ाने के लिए मदद करता है। आप पति या पत्नी आप के लिए एक बहुत प्यार करते हो जाएगा।

    • एक और totka जिसके लिए आप Nariyal, धतूरे के बीज और कपूर का पेस्ट तैयार करने के लिए है। यह करने के लिए कुछ शहद जोड़ें और यह अच्छी तरह मिला दें। तिलक के रूप में अपने माथे पर इस लेप। आप दैनिक आधार पर इस तिलक लागू करना चाहिए। व्यक्ति तुमसे प्यार करते हैं कभी नहीं होगा अपने जीवन से जाना।

    • अपने पति को आप में रुचि नहीं दिखा रहा है तो आप यह एक और totka कोशिश करनी चाहिए। जब आप दोनों भोजन लेने, उस समय पर अपनी थाली से कुछ खाना लेने के लिए और अपने जानने के बिना अपने पति की थाली में डाल दिया। यह जादुई काम करता है और आप दोनों के बीच प्यार का एक बहुत पैदा करते हैं।

    • इसके अलावा यह से, तो आप इस एक और कोशिश कर सकते हैं। शुक्रवार या गुरुवार मध्यरात्रि को पति की छोटी से कुछ बाल काटने। और आप उन्हें एक ही स्थान पर रखने के लिए तो वह उन्हें देखने के लिए सक्षम नहीं होगा है। कुछ दिनों (4-5 दिन) के बाद अपने घर से बाहर इन बाल फेंक देते हैं। जब भी आप महसूस वह आप का पालन नहीं कर रहा है, तो आप इस totka कोशिश कर सकते हैं।

  • नवरात्र के दौरान, भगवान शिव मंदिर जाने के लिए और शिवलिंग को panchmrit सेवा करते हैं। इस के बाद, पूरे मंदिर को साफ। फिर, नियमों के अनुसार भगवान शिव की पूजा। 10 बजे उसी दिन, 108 बार आग को प्रकाश और आग में इस मंत्र ओम नमः शिवाय और प्रस्ताव का जप करें।

कार्य की सफलता हेतु :

किसी महत्वपूर्ण कार्य से बाहर जा रहे हैं तो प्रात:काल तीन इलायची दाएं हाथ की मुट्ठी में रखें और श्रीं श्रीं बोलें और फिर उसे खालें। खाने के बाद बाहर जाएं।

वेतन और प्रमोशन के लिए : 

अगर लाख मेहनत करने पर भी मनचाहा वेतन या प्रमोशन नहीं मिल रहा है तो आज से ही रोज रात में एक हरे कपड़े में एक इलायची को बांधकर तकिए के नीचे रखकर सो जाएं और प्रात: उसे घर के किसी बाहरी व्यक्ति को दे दीजिए।

सुंदर बीबी पाने के लिए : 

यदि आप सुंदर बीवी चाहते हैं तो हर गुरुवार सुबह पांच इलायची, पीले वस्त्र के साथ किसी गरीब को दान दें। यह उपाय कम से कम पांच गुरुवार करें। इस उपाय से अवश्य लाभ होगा।

दरिद्रता दूर करने हेतु :

किसी दरिद्र, असहाय या हिजड़ों को एक सिक्का दान करें साथ ही उसे हरी इलायची खिलाएं। ऐसा जब भी मौका मिले करते रहें। यदि यह टोटका नहीं कर सकते हैं तो अगर आप धनवान बनना चाहते हैं तो आप अपने पर्स में हमेशा 5 इलायची जरूर रखें

शिक्षा में सफलता के लिए : 

शुक्ल पक्ष के पहले बृहस्पतिवार को सूर्यास्त से ठीक आधा घंटा पहले बड़ के पत्ते पर पांच अलग-अलग प्रकार की मिठाइयां तथा दो छोटी इलायची पीपल के वृक्ष के नीचे श्रद्धा भाव से रखें और अपनी शिक्षा के प्रति कामना करें। घर आते समय पीछे मुड़कर न देखें। इस प्रकार बिना क्रम टूटे तीन बृहस्पतिवार करें।

पति पत्नी में प्रेम स्थापित करने के लिए :

 अगर पति का पत्नी के प्रति प्यार कम हो गया हो तो श्रीकृष्ण का स्मरण कर शुक्रवार के दिन तीन इलायची अपने बदन से स्पर्श करके पल्लू या रुमाल में बांध कर अपने पास ही रखें। शनिवार की सुबह वह इलायची पीस कर किसी भी व्यंजन में मिलाकर पति को खिला दें। ऐसा तीन शुक्रवार को करना है तो लाभ मिलेगा। इसके अलवा यह उपाय रविवार को भी कर सकते हैं।

शीघ्र विवाह के लिए : 

यदि विवाह में विलंब हो रहा है तो यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को किया जा सकता है। इस प्रयोग में मंदिर में गुरुवार की शाम को दो हरी इलाइची के साथ पांच प्रकार की मिठाई और शुद्ध घी के दीपक के साथ जल अर्पित करना चाहिए। यदि स्त्री हैं तो पीले गुरुवार करें और पुरुष हैं तो शुक्रवार करें।

शुक्र का उपाय :

 यदि आपका शुक्र कमजोर है या खराब असर दे रहा है, तो एक लौटा जल लेकर 2 बड़ी इलायची डालकर पानी के आधा होने तक उबालें। फिर इस पानी को अपने नहाने वाले पानी में मिला कर स्नान करें। स्नान करते वक्त पवित्रता का ध्यान रखें। वाहन से जुडे मामलों में भी यह उपाय लाभकारी है।

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>पति और पत्नी में प्रेम संबंध स्थापित करने के लिए भी फेंगशुई के अनुसार तोते के जोड़े को स्थापित किया जाता है।

फेंगशुई के अनुसार तोता 5 तत्वों का संतुलन स्थापित करने में मददगार साबित होता है। तोते के रंग-बिरंगे पंख वास्तव में पृथ्वी, अग्नि, जल, लकड़ी और धातु के प्रतीक हैं। अगर घर में इनमें से किसी भी तत्व की कमी है, तो वह इससे दूर हो जाती है।

अगर आप घर में बीमारी, निराशा, दरिद्रता और सुखों का अभाव महसूस कर रहे हैं तो तोते का चित्र या मूर्ति घर में स्थापित करें

तोता प्रेम, वफादारी, लंबी आयु और सौभाग्य का प्रतीक होता है।

सावधानी : 

बहुत से लोग पिंजरे में तोता पाल लेते हैं, लेकिन तोता पालना बहुत ही गलत है। लाल किताब के अनुसार कुंडली का विश्लेषण करके बहुत से लोगों को तोता नहीं पालने की हिदायत दी जाती है और बहुत से लोगों को बुधवार के दिन पिंजरे में कंठी वाला तोता पालने का कहा जाता है लेकिन उसके लिए नियम बनाए गए हैं।

यदि किसी ने गलती से तोता पाल लिया है तो उसे तुरंत की लाल किताब के विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। हो सकता है कि यह तोता ही आपके दुर्भाग्य और बर्बादी का कारण हो। पले हुए तोते यदि खुश नहीं हैं तो वह रोज आपको बद्दुआ देगा। आपको यह समझना चाहिए कि पक्षियों को बंधक बनाकर रखना पाप है। इसके कई दुष्परिणाम भुगतने होते हैं।

दरअसल, तोतों में यह क्षमता है कि वो जो भी सुनते हैं उसे आसानी से याद कर लेते हैं और उसे वे मन ही मन या बोलकर दोहराते रहते हैं। ऐसे में अगर आपके घर में गाली-गलौच या झगड़े चलते हैं तो वह भी इसी प्रकार का व्यवहार करेगा। इससे आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा का स्‍थायी निर्माण हो जाएगा। इस तरह तोता पालना कई मामलों में शुभ भी है और अशुभ भी।

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वास्तु के अनुसार घर की छत पर नहीं रखना चाहिए कबाड़ और गैर जरूरी सामान, ये चीजे भी वास्तु के अनुसार घर के सदस्यों के करीबी रिश्तो पर असर डालते है.

शायद अपने सुना होगा, झूठा खाने से प्यार और स्नेह बढ़ता है लेकिन, वास्तु के अनुसार दोस्तों के साथ रिश्ते को मजबूत बनाए रखने के लिए झूठा खाने से बचना चाहिए। वास्तु के अनुसार झूठा खाना भी लड़ाई का एक कारण बन सकता है.

बहुत से व्यक्ति अक्सर घर के मन गेट के पीछे या सामने गंदे कपड़े रख देते है,  वास्तु के अनुसार घर के मेन गेट के आस पास की जगह अपने खास रिश्तो को प्रभावित करने वाली मानी जाती है. इसलिए घर में दरवाजे के पीछे भूल कर भी गंदे कपड़े  नहीं रखे.

दोस्तों को कभी भी रुमाल और परफ्यूम  गिफ्ट नहीं करना चाहिए, इन चीजे से दोस्तों के  बीच अविश्वास बढ़ जाता है और लड़ाई झगडे का कारण बन जाती है.

शनिवार के दिन दोस्तों से किसी भी तरह का लेन देन और  बेवजह बहस करने से बचना चाहिए।  इस दिन वाद विवाद बढ़ सकते है और कोई बड़ा विवाद हो सकता है. वास्तु के अनुसार ये सभी काम करने से बचना चाहिए।

दोस्तों के बीच प्यार को बनाये रखने के लिए कभी भी काले कलर की चीजों का लेन देन नहीं करना चाहिए। काला रंग राहु को प्रभावित करता है.

 विवाह योग्य युवक-युवती जिस पलंग पर सोते हों उसके नीचे लोहे की वस्तुएं या कबाड़ का सामान कभी भी नहीं रखना चाहिए।

 कन्या सफेद खरगोश को पाले तथा अपने हाथ से उसे भोजन के रूप में कुछ दे|

 यदि विवाह के पूर्व लड़का-लड़की मिलना चाहें तो वह इस प्रकार बैठे कि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर न हो।

 विवाह वार्ता के लिए घर आए अतिथियों को इस प्रकार बैठाएं कि उनका मुख घर में अंदर की ओर हो, उन्हें द्वार दिखाई न दे।

 कन्या जब किसी कन्या के विवाह में जाये और यदि वहाँ पर दुल्हन को मेहँदी लग रही हो तो अविवाहित कन्या कुछ मेहँदी उस दुल्हन के हाथ से लगवा ले इससे विवाह का मार्ग शीघ्र प्रशस्त होता है।

 जिन लड़कों का विवाह नहीं हो रहा हो या प्रेम विवाह में विलंब हो रहा हो, उन्हें शीघ्र मनपसंद विवाह के लिए श्रीकृष्ण के इस मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए ::

                          क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा।

कन्या के विवाह की चर्चा करने उसके घर के लोग जब भी किसी के यहाँ जायें तो कन्या खुले बालों से,लाल वस्त्र धारण कर हँसते हुए उन्हें कोई मिष्ठान खिला कर विदा करे| विवाह की चर्चा सफल होगी|

 विवाह योग्य लोगों को शीघ्र विवाह के लिये प्रत्येक गुरुवार को नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए. भोजन में केसर का सेवन करने से विवाह शीघ्र होने की संभावनाएं बनती है|

  विवाह योग्य व्यक्ति को सदैव शरीर पर कोई भी एक पीला वस्त्र धारण करके रखना चाहिए|अगर किसी का विवाह कुण्डली के मांगलिक योग के कारण नहीं हो पा रहा है, तो ऎसे व्यक्ति को मंगल वार के दिन चण्डिका स्तोत्र का पाठ तथा शनिवार के दिन सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए. इससे भी विवाह के मार्ग की बाधाओं में कमी होती है.

 

 

घर में घी का दीपक :

रोज़ घर में घी का दीपक जलाने से घर में ही शुभता नहीं होती बल्कि पूरे परिवार का स्‍वास्‍थ्‍य भी बेहतर रहता है। दीपक जलाते समय इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए कि उसकी लौ पूर्व या दक्षिण की ओर हो। जब दीपक जलाएं तो मध्‍य में फूलदार बाती लगाना चाहिए, इससे शुभता व स्‍वास्‍थ्‍य में वृद्धि होती है।

लोटे या गिलास में पानी भरकर :

रात को किसी लोटे या गिलास में पानी भरकर रख दें। सुबह उठकर उसे पी लें और पानी पीने के बाद उस बर्तन को उल्‍टा करके रख दें। माना जाता है कि इससे यकृत संबंधित परेशानियां दूर हो जाती हैं और इससे संबंधित परेशानी कभी होती नहीं तथा हमेशा उत्तम और अच्छा स्वास्थ्य बना रहता है। कुछ ही दिन के इस प्रयोग से अद्भुत परिणाम देखने को मिलते हैं।

कमरे में कपूर :

रात को सोते समय कमरे में कपूर जलाने से किसी तरह के ख़राब सपने या बीमारियों का आगमन नहीं होता है। रात को अच्‍छी नींद आती है और सुबह मन-मस्तिष्‍क फ्रेश रहता है। पितृदोष का नाश होता है तथा घर में शांति बनी रहती है।

धान कूटने वाला मूसल और झाडू रोगी :

एक अद्भुत टोटका है जिसका परिणाम प्रयोग करने के बाद नज़र आएगा। यदि घर में कोई बीमार है तो धान कूटने वाला मूसल और झाडू रोगी के ऊपर से उतार कर उसके सिरहाने रख दें। आश्‍चर्यजनक रूप से अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करते देखा गया है। दवाएं तेज़ी से कार्य करने लगती हैं।

मंदिरों में गुप्‍त दान :

मंदिरों में गुप्‍त दान करने से भी रोगी रोग मुक्‍त होते देखे गए हैं। दान करते समय इतना ध्‍यान देना चाहिए कि दान वाली वस्‍तुएं काली न हों और दान सोमवार को करना चाहिए।

कपास के पांच फूल :

कपास के पांच फूल लें रऔ रविवार की शाम को आधा कप पानी में भिगो दें। सुबह उठकर फूल निकालकर फेंक दें और पानी पी जाएं। फूल भिगोने के लिए रोज़ एक ही पात्र का प्रयोग करना चाहिए। पात्र बदलना नहीं चाहिए।

मधु (Honey)में चंदन :

बीमार व्‍यक्ति को मधु में चंदन मिलाकर चटाने से भी लाभ होता है।

रोगी का कपड़ा या पहनने वाली कोई वस्‍तु :

रोगी का कपड़ा या पहनने वाली कोई वस्‍तु उसके सिर पर सात बार ओइछ कर यानी क्‍लाकवाइज घुमाकर गुप्‍त दान कर देने से भी स्‍वास्‍थ्‍य में शीघ्रता से सुधार होता है। यह प्रयोग रोग मुक्‍त होने तक सप्‍ताह में एक बार अवश्‍य करना चाहिए।

 

यदि आप भी बेरोजगार हैं और बहुत प्रयत्न करने पर भी रोजगार नहीं मिल रहा है तो निराश होने की कोई जरुरत नहीं है।

कुछ साधारण तांत्रिक उपाय कर आप रोजगार पा सकते हैं।

शनैश्चरी अमावस्या के दिन एक कागजी नींबू लें और शाम के समय उसके चार टुकड़े करके किसी चौराहे पर चारों दिशाओं में फेंक दें। इसके प्रभाव से भी जल्दी ने बेरोजगारी की समस्या दूर हो जाएगी।

मंगलवार से प्रारंभ करते हुए 40 दिनों तक रोज सुबह के समय नंगे पैर हनुमानजी के मंदिर में जाएं और उन्हें लाल गुलाब के फूल चढ़ाएं। ऐसा करने से भी शीघ्र ही रोजगार मिलता है।

शनिवार को हनुमानजी के मंदिर में जाकर सवा किलो मोतीचूर के लड्डुओं का भोग लगाएं। घी का दीपक जलाएं और मंदिर में ही बैठकर लाल चंदन की या मूंगा की माला से 108 बार नीचे लिखे मंत्र का जप करें-

कवन सो काज कठिन जग माही।

जो नहीं होय तात तुम पाहिं।।

इसके बाद 40 दिनों तक रोज अपने घर के मंदिर में इस मंत्र का जप 108 बार करें। 40 दिनों के अंदर ही आपको रोजगार मिलेगा।

 

इंटरव्यू में जाने से पहले लाल चंदन की माला से नीचे लिखे मंत्र का 11 बार जप करें-

ऊँ वक्रतुण्डाय हुं

जप से पूर्व भगवान गणेश की पूजा करें और गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करते हुए दूध से अभिषेक करें।